“ प्यार का त्योहार ” बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

होली का त्यौहार दो दिन मनाया जाता है। प्रथम दिवस को होलिका दहन या छोटी होली कहां जाता है। दुसरे दिन को कई नामो से पुकारा जाता है जैसे होली धुलेंडी या धूलिवंदन- क्योकि होलिका जलाने बाद राख से तिलक लगाने के बाद ही रंग खेले जाते है फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं । होली मे ग़ुलाल तथा अबीर की महक ,गुझिया मिष्ठान का स्वाद ,भांग की मस्ती ,हास्य कवियों के दरबार ,बुरा ना मानो होली है की आवाजों के बीच छेड़छाड़- रंग खेलते हुए नाचना भी शामिल है होली का त्यौहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। फाग होली के अवसर पर गाया जाने वाला एक लोकगीत है। इस दिन से फाग का गाना प्रारंभ हो जाता है। ब्रजमंडल की होली विश्व प्रसिद्ध है । अग्नि जलाकर उसके चारों ओर नृत्य करना आदिकालीन प्रथा है। होली के अवसर पर अलग अलग प्रांतो मैं अलग अलग नृत्य प्रचलन मै है ।

भगवान कृष्ण को समर्पित- फाग या फाल्गुन नृत्य हरियाणा
फाग
भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के साथ होली खेलने को समर्पित है तथा फाल्गुन के मधुर महीने को मनाने के लिए किया जाता है। किसानों द्वारा रबी और कटाई की अवधि के बीच डफ नगाड़ा और ढोलक की ताल पर किया जाता है । नृत्य का प्रदर्शन महिलाओ द्वारा गुलाल के साथ घेरे मे किया जाता है, महिलाएं कपडे को गोल घुमा कर रस्सी का कोड़ा बना लेती है तथा घेरे मैं खड़े पुरष को मारती है पुरुष इस मार से बचने की कोशिश करते हुए देखने वाले को आनंद से सरोबोर कर देते है ।।
विशाल नगाड़े बमरसिया की गूँज पर बमरसिया या बम नृत्य: राजस्थान
बम लोक नृत्य राजस्थान के अलवर और भरतपुर क्षेत्र में प्रचलित है और ‘होली’ के त्योहार पर किया जाता है। बमरसिया शब्द दो शब्दों के मेल से बना है बम तथा रसिया ‘बम’ एक विशाल नगाड़े का नाम है, जो दो फुट चौड़ा ढाई फुट ऊँचा होता है जिसे दो व्यक्ति डंडों से बजाते हैं इसके इलावा अन्य वादक चिमटा, थाली, मंजीरा, खड़ताल व ढोलक आदि बजाते हैं और नर्तक रंग बिरंगे पंखों से बंधी लकड़ी को हाथों में लेकर उसे हवा में उछालते हैं। इस नृत्य के साथ होली के गीत और रसिया गीत नृत्य के साथ गाये जाते है इस लिए इस नृत्य को बमरसिया कहा जाता है।।

फगुआ- बिहार
बिहार मैं फगुआ नृत्य होली के अवसर पर किया जाता है बिहार मैं होली को फगवा ,होलिका दहन को ‘संवत्सर दहन’ के नाम से जाना जाता है ग्रामीण पूरे हर्षोल्लास के साथ ढोलक, झाल-मंजीरा, आदि जैसे वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य करते हैं।यह नृत्य भक्त प्रह्लाद और उनके दैत्य पिता हिरण्यकशिपु की कथा से संबंधित है, बिहार में होली गीत एक विशिष्ट शैली धमार मैं गाया जाता है ।।
झोंपड़ी जला ‘चंद्रमा की रोशनी’ में नृत्य – मणिपुर थबल चोंगबा
लोक नृत्य में थबल चोंगबा मणिपुर का एक लोकप्रिय मणिपुरी नृत्य है, जो होली के त्योहार के साथ संबंधित है। थबल का शब्दिक अर्थ है ‘चंद्रमा की रोशनी’ और चोंगबा का अर्थ है ‘नृत्य’, इस प्रकार इसका पूरा अर्थ है चंद्रमा की रोशनी में नृत्य करना। मणिपुर में होली पूरे 6 दिनों तक चलती है, जिसे ‘योसांग’ कहा जाता है। पारम्परिक रूप से पुरानी विचारधारा वाले मणिपुरी अभिभावक अपनी बेटियों को उनकी स्वीकृति के बिना बाहर जाने और युवाओं से मिलने की अनुमति नहीं देते थे। इस लिए थबल चोंगबा ने लड़कियों को लड़कों से मिलने और बाते करने का एक मात्र अवसर दिया जाता है। पुराने समय में यह नृत्य लोक गीतों के साथ चंद्रमा की रोशनी में किया जाता था। इसमें उपयोग किया जाने वाला एक मात्र संगीत वाद्य ढोला कोर ड्रम है। इसे त्योहार के पूरे 6 दिनों तक हर स्थान पर आयोजित किया जाता है। यहाँ आग के स्थान पर एक झोंपड़ी बनाई जाती है और फिर उसे जलाया जाता है। अगले दिन लड़के समूह में जाकर लड़कियों के साथ गुलाल खेलते हैं और लड़कों के साथ गुलाल खेलने के बदले में लड़कियाँ लड़कों से पैसे लेती हैं।।
पुरुषों का नृत्य गींदड़ नृत्य – राजस्थान
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का सामूहिक लोक नृत्य हैं गींदड़ नृत्य -जो पुरुषों द्वारा विशेष रूप से’ होली ‘के अवसर पर किया जाता है। इस नृत्य के मुख्य वाद्ययंत्र हैं- नागदा, ढोल, डफ और चांग। एक ढोल की थाप पर पुरुष हाथों में दो डंडे लिए हुए नृत्य करते हैं। यह एक स्वांग नृत्य है कई लोग भगवान शिव,भगवान राम माता पार्वती या माता सीता साधु, आदि का स्वांग बना कर भी नृत्य करते है ।।
महिलाओं का नृत्य -लूर नृत्य – राजस्थान
मारवाड राजस्थान का यह नृत्य फाल्गुन माह में प्रारंभ हो कर होली दहन तक चलता है। यह महिलाओं का नृत्य है। महिलाएँ गाँव में नृत्य स्थल पर इकट्ठा होती है एवं एक बड़े घेरे में नाचती हैं।।
जोगीड़ा गीतों की गूंज एवं जोगीड़ा नृत्य- बिहार
जोगीड़ा नृत्य बिहार का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। नृत्य का आयोजन होली पर होता है। लोग परस्पर रंग, गुलाल और अबीर लगाते हैं बिहार में जोगीड़ा गाने की प्रथा है ।।

उत्तर प्रदेश के बृज क्षेत्र से उत्पन्न चरकुला नृत्य केवल महिलाएं करती हैं। वे अपने सिर पर 108 से अधिक जलते हुए दीपकों को बड़े बहुरंगी लकड़ी के गोलाकार पिरामिड पर सजा कर ,संतुलन बनाते हुए भगवान कृष्ण को समर्पित रायसा ’गीतों पर नृत्य करती है। यह होली के दिन या होली के दूसरे दिन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि उस दिन राधा का जन्म हुआ था। शुरुआती दिनों में गाँव के पुरुष सूर्यास्त के बाद एक महिला के भेष में, अपने सिर पर मिट्टी के सात घड़े और उसके ऊपर एक दीपक जलाते थे, और लगातार नृत्य करते थे। गांव मुखराई के प्यारे लाल ने 1845 में चरकुला को नया रूप दिया था उन्होंने ही प्रथम बार लकड़ी तथा लोहे के गोलाकार पिरामिड पर मिट्टी के 108 दीपक रख पांच मंजिला चरकुला बनाया ।।
108 जलते दीपकों की छठा -चरकुला, या चार कुल – उत्तर प्रदेश
गालियों के साथ भजन और गेर नृत्य — राजस्थान के भील जाति के पुरुष और महिला पारंपरिक परिधान पहने होली एवं जन्माष्टमी पर यह नृत्य करते है गेर नृत्य होली के दुसरे दिन धुलंडी से प्रारंभ होकर 15 दिनों तक चलता है पुरुष गोल घेरा बना कर अलग अलग मंडल बना कर नृत्य करते है और अपने हाथ मे पकडे डंडे से ताल देते हैं यहाँ के बालोतरा गॉव मे होली की गालियों के साथ भजन सुनने को मिलेंगे गेर नृत्य तो साथ साथ चलता ही है ।।
घेरिया रास गुजरात
गुजरात के पंचमहल, भरूच और वड़ोदरा इलाके के निवासी तडवी समुदाय के लोगों का घेरिया नृत्य लोकप्रिय नृत्य हैं। होली के त्योहार के दूसरे दिन, गांवों में युवा होली की राख को अपने शरीर पर रगड़ते हैं। कुछ लोग अपने शरीर पर चूना का चिह्न बनाते हैं और गले में भोरिंगनी के बीजों की माला, नीम के पत्तो से बनी टोपी ,पावो मैं घुंघरू पहन कर नृत्य करते है हैं। नृतक हाथों में मोर पँख ले कर नृतकों के बीच घुमते है -नर्तक छोटे डंडे हाथो मे पकड़ कर गरबे की तरह ही अपने साथी के डंडे पर मारते हुए नृत्य करते है-
होली मुख्य रूप से भारत मे मनाया जाने वाला त्यौहार है जिसे मनाने की अलग अलग अनेक परंपरा हैं दक्षिण के कर्नाटक मे अंगारो से होली खेली जाती है तो मध्य प्रदेश के भील समुदाय मे होली के सात दिन पहले शुरू होने वाले भगोरिया उत्सव मे लड़के रंग लगा लड़की को प्रेम प्रस्ताव देते है, बरसाना की लठ मार होली ,कुमाऊँ की गीत बैठकी, पंजाब के होला मोहल्ला मैं युद्ध कला का प्रदर्शन, मथुरा वृंदावन का भक्ति रस- इत्यादि होली के अनेक रंग हैइत्यादि होली के अनेक रंग है होली का हर रंग समाज को जोड़ने का कार्य करता है। तमिलनाडु राज्य में लोग होली को तीन अलग-अलग नामों से जानते हैं जिनमें कामन पांडिगई, कामविलास और काम-दहनम हैं। परन्तु लोक मान्यता अनुसार यह भगवान् शिव द्वारा कामदेव को भसम करने के प्रसंग से जुड़ी हुई है ।।